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Sunday, July 1, 2012

तुझको मैंने जब-जब सोंचा

तुझको मैंने जब-जब सोंचा है बार-बार,
बहते हुए अश्कों को पोंछा है बार-बार,
यूँ तो बहुत कुछ मैं भूल चूका हूँ, पर,
यादों ने तेरी मुझको नोचा है बार-बार,
सारे घाव जिस्म पर अब सूख गए हैं,
दिल का जखम दिल ने खरोंचा है बार-बार,
देखने के लिए मुझको जिन्दा हूँ या नहीं,
मेरे तन को चाकुओं से कोंचा है बार-बार..........

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