Saturday, September 29, 2012

यादें तेरी गोदी में जब झुलाती हैं

नदियाँ कितनी -- आँखें मेरी बहाती हैं,
यादें तेरी गोदी में - - - जब झुलाती हैं,
 

थोड़ी-थोड़ी अब भी - उम्मीद है बाकी,
आजा तुझको साँसे - - मेरी बुलाती हैं,
 

बहता दरिया है- आफत का लहू बनके,
जब भी उलझन -- बातें तेरी बढ़ाती हैं,
 

सारे मेरे - - बेचैनी से --- भरे हैं दिन,
करवट - करवट में - रातें बीत जाती हैं,
 

बन गम मुझमें, बहता है प्रेम का सागर,
लहरें जीवन की -- जलती लौ बुझाती हैं,
 

होता मेरे है - - - जख्मों में - दर्द ज्यादा,
जब-
जब काँटा -- - चीज़ें तेरी चुभाती हैं.

Thursday, September 27, 2012

छोड़ा है मुझको तन्हा बेकार बनाके

छोड़ा है मुझको तन्हा --- बेकार बनाके,
मेरे ही गम का मुझको - औज़ार बनाके, 


तड़पाया उसने मुझको, हर रोज़ सजा दी,
यादों को भर है डाला -- हंथियार बनाके,
 

दिल में तेरा ही, तेरा ही -- प्यार भरा है,
पूजी है तेरी मूरत ----- सौ बार बनाके,


घोटाला - है रिश्वत - भ्रस्ठाचार बढा है,
जनता की बिगड़ी हालत, सरकार बनाके,
 

धड़कन को मेरी साँसों, को काम यही है,
जख्मों को रक्खा मुझमें, त्योहार बनाके,
 

समझे जो दुनियादारी -- वो दौर नहीं है,
खबरें उल्टी सीधी की --अखबार बनाके,
 

आँखों का पहले जैसा -- अंदाज़ नहीं है,
कर बैठी हैं अश्कों का-- व्यापार बनाके..

Monday, September 24, 2012

तुझको मुझसे अच्छा दिवाना मिल जाये

अश्कों को बहने का--- बहाना मिल जाये,
टूटे दिल को मेरे ---- ठिकाना मिल जाये,
 

मांगी है मैंने बस दुआ ----- इतनी रब से, 
तुझको मुझसे अच्छा-- दिवाना मिल जाये,
 

चाहत में प्यार की --किस्मत कुछ ऐसी हो,
सबके दिल को दिल का, खज़ाना मिल जाये,
 

धीरे-धीरे बढ़ता सिलसिला-- है जख्मों का,
थोडा मरहम मुझको--- लगाना मिल जाये,
 

साँसे सीने में -------- आखिरी हैं ऐसे में,
गुजरा मुझको मेरा ---- ज़माना मिल जाये,

Saturday, September 22, 2012

कीमत चाहत की

कीमत चाहत की अदा कर भूल गई,
वो खुद से मुझको जुदा कर भूल गई,
 

नम नैना मेरे, ---- उम्र भर संग रहे,
जुल्मी मुझको, गुदगुदा कर भूल गई,
 

मुझमे कायम, यूँ दर्द-गम-जखम रहा,
खुद को मेरा वो,--- खुदा कर भूल गई,
 

चाहा जब तक खूब मुझको प्यार किया,
फिर वो अपना,-- फायदा कर भूल गई,


मांगे मैंने फूल------ उससे प्यार भरे,
बोझा काँटों का,---- लदा कर भूल गई....

Thursday, September 20, 2012

यादों का मैं गोदाम बेंच दूँ

चाहत के पल,.... बेदाम बेंच दूँ,
फुरसत के दिन, आराम बेंच दूँ,
 
मुस्किल है,... कांटेदार जिंदगी,
फूलों को गम का,...बाम बेंच दूँ,
 
धोखा... बेचैनी.... और... बेबसी,
दिल को दिल का मैं काम बेंच दूँ,
 
गायब हो,, ये,,, मुस्कान होंठ से,
नैनों को इतना,,,,,, जाम बेंच दूँ,
 
रहता है तन्हा,,, रोज़- रोज़ दिल,
यादों का मैं,,,,,,,, गोदाम बेंच दूँ,

Wednesday, September 19, 2012

बेवफा है वफ़ा का ज्ञान देती है

बेवफा है, वफ़ा का, ज्ञान देती है,
जख्म देकर दर्द पे, ध्यान देती है,
 

इश्क में मैं जला हूँ, हर घडी यूँ ही,
रोज़ चादर ग़मों की, तान देती है,
 

मैं जिया हूँ, मरा हूँ, साथ यादों के,
मौत का वो मुझे, सामान देती है,
 

खेल है ये मुहब्बत, का बुरा इतना,
जिंदगी को जिंदगी ही, जान देती है,
 

सोंचता हूँ कभी, जो मैं भुलाऊं तो
और भी याद, उस दौरान देती है........

Sunday, September 16, 2012

दुश्मन तुझे दिल का कट्टर बना के

दुश्मन तुझे दिल का, कट्टर बना के,
पूजा करूँ तुझको, पत्थर बना के,
 

सोता रहूँ जीवन भर, चैन से मैं,
काटों तले अपना, बिस्तर बना के,
 

चल दी कहाँ ऐसे, जल्दी जुदा हो,
मेरी दशा इतनी, बत्तर बना के,
 

ना तो दुआ से, ना राहत दवा से,
तुमने थमाया गम, गठ्ठर बना के,
 

शिकवा गिला करता हूँ, रोज़ तुझसे,
तेरे खयालों का, उत्तर बना के....

Friday, September 14, 2012

साफ़ आटा लगे जैसे चोकर मिला

हौसला दिल्लगी का, दिल खोकर मिला,
प्यार मेरे गले मुझको, रोकर मिला,
 

फूल खिल ना सके, चाहत के फिर कभी,
प्रेम मुझको सदा, गम में धोकर मिला,
 
जिंदगी का दिया, जलकर बुझ भी गया,
फासला वक़्त का ना, कम होकर मिला,
 
अश्क हैं बह रहे, भीगी बरसात है,
रात का कारवां, मुझको सोकर मिला,
 
बेवफा है, वफ़ा का, पहने नाकाब है,
साफ़ आटा लगे, जैसे चोकर मिला,

चोकर = छानबुर, आटे को छानने के बाद निकलने वाला पदार्थ.

Wednesday, September 12, 2012

हूँ मैं चुप तू भी बोलना छोड़ दे

नम नैनो में गम, घोलना छोड़ दे,
हूँ मैं चुप तू भी, बोलना छोड़ दे,

है वादा तुम्हे मैं, भुला दूँ अभी,
तू यादों में गर, डोलना छोड़ दे,

कुछ पल के लिए, सूख जाये नमी,
तू अश्कों का नल, खोलना छोड़ दे,

जिद ना कर कहना, मान भी जा कभी,
दौलत चाहत की, तोलना छोड़ दे,

जाती दिल से मेरे, दरारें नहीं,
भूले बिसरे पल, छोलना छोड़ दे...

छोलना = छीलना 

Monday, September 10, 2012

अपने ही दिल का सताया हुआ हूँ

बेघर हूँ सब कुछ, लुटाया हुआ हूँ,
अपने ही दिल का, सताया हुआ हूँ,

घर से मेरे रौशनी, खो गई है,
जलता दीपक, बुझाया हुआ हूँ,
 
बूंदों की मुझको, जरुरत नहीं है,
अश्कों का सागर, उठाया हुआ हूँ,
 
काटों से मुझको, मुहब्बत हुई है,
फूलों को दुश्मन, बनाया हुआ हूँ,
 
अब तो तेरी, दिल्लगी जिंदगी है,
यादों में जी भर, नहाया हुआ हूँ,
 
चाहा है तुझको, हदों की हदों तक,
रब से भी आगे, बिठाया हुआ हूँ,
 
तेरे वास्ते है दुआ, भी दवा भी,
मैं गम का मरहम, लगाया हुआ हूँ.

Saturday, September 8, 2012

मैंने मुहब्बत कर ली है वो वाली

जाती नहीं मेरी, आँखों की लाली,
आदत निगाहों, को कैसी डाली,

साँसे दीवानी हैं, पागल है धड़कन,
मैंने मुहब्बत कर, ली है वो वाली,
 
दिन रात है यूँ, बेचैनी का आलम,
कर दो न घर, मेरे यादों का खाली,
 
गम से भरा है, मेरे दिल का कोना,
कैसी मुसीबत, ये मैंने है पाली,
 
रिश्ते निभाऊं, या तोडूं हर बंधन,
बजती नहीं है, अब रिश्तों की ताली.

Thursday, September 6, 2012

गम मेरा झलक गया

आँखों से जो हंसा तो सागर छलक गया,
सारा का सारा गम फिर मेरा झलक गया,

ना पलटी, ना ही देखा, इक भी बार मुझे,
मैं पीछे - पीछे उसके, मीलों तलक गया,
 
मेरी चिल्लाहट, ना मेरी आवाज सुनी,
धीरे - धीरे भारी, हो मेरा हलक गया,
 
इतना कुछ, पल दो पल में, मेरे संग हुआ,
बारिश ही बारिश, भर मुझमे फलक गया,
 
कुछ ऐसे दोस्तों, थी मेरी तकदीर जली,
चिंगारी भड़की सीने में, मैं बलक* गया.


*बलक = उबलना 

Wednesday, September 5, 2012

मैं आँखें भर-२ रोता हूँ

सोयी-२ रातों में, मैं जागा-जागा होता हूँ,
पल-२ तेरी यादों में, मैं आँखें भर-२ रोता हूँ, 

टूटा-टूटा रहता हूँ, खोई-खोई सी उलझन में,
दिल के कोने-२ में, मैं गम ही गम बस बोता हूँ,
 
चाहत की गहराई, ना मैं समझा, ना मैं जाना,
छोड़ा फूलों नें पत्थर कर, काटों में मैं जोता हूँ,
 
जीता हूँ मैं मरता हूँ, तेरे ख्यालों में अक्सर,
दर-२ मैं इस दुनिया में, जख्मों को लेकर ढोता हूँ,
 
मुस्किल है मुस्किल है, इन हालातों में मेरा जीना,
साँसों की डोरी तोड़ी है, आखिर अब मैं सोता हूँ.

Monday, September 3, 2012

प्रेम की, गिनती अढ़ाई है

नहीं पूरी प्रेम की, गिनती अढ़ाई है,
तभी मुस्किल प्रीत की, इतनी पढ़ाई है,

न जाना कोई न समझा, दिल्लगी दिल की,
बड़ी टेढ़ी रीत, नम पथ की चढ़ाई है,

तले पलकों के रखा, तुझको छुपा मैंने,
पर्ते दिल पे चाँद सी, सूरत मिढ़ाई है, 
 
जले हैं शोले, लगी है आग सीने में,
दर्द की कीमत, दिलों ने ही बढ़ाई है,

चढ़ा जादू इश्क का, इस तरह कुछ मुझपे,
मुहब्बत के नाम की, दिल पे कढ़ाई है....

Sunday, September 2, 2012

बेचैन मेरे दिल को, आराम चाहिए

बेचैन मेरे दिल को, आराम चाहिए,
तरसी निगाहों को भी, पैगाम चाहिए,

हालात हैं नाजुक, है गम का सहारा,
खामोश होंठों को थोडा, जाम चाहिए,
 
मुझको उम्रभर के लिए, हासिल दर्द है,
नमकीन अश्कों को घर में, काम चाहिए,
 
मदहोश कर पहले, जख्मों से नवाजा,
दीवानगी का बाकी अब, अंजाम चाहिए,
 
हर बार तूने तोडा, दिल का भरोसा,
अब और कुछ भी करने का, दाम चाहिए.