आइये आपका स्वागत है

Friday, November 30, 2012

जखम - छुपाना पड़ेगा

लबों पर हंसी को, बिछाना पड़ेगा,
निगाहों का पानी, सुखाना पड़ेगा,

नमक लेकर पीछे, जमाना पड़ा है,
जखम अपने दिल का, छुपाना पड़ेगा,

भरोसे के बदले, करे शक हमेशा,
मुहब्बत का लहजा, सिखाना पड़ेगा,

उदासी का आलम,हुआ साथ मेरे,
तबाही का बोझा, उठाना पड़ेगा,

वफ़ा करते-करते, लुटा चैन मेरा,
जुदाई में जिन्दा, जलाना पड़ेगा, 

नहीं इतनी अच्छी, सनम दिल्लगी है,
दगा का तुम्हें ऋण, चुकाना पड़ेगा।

24 comments:

  1. पाना अब मुश्किल हुआ, खोना है आसान ।

    बड़े दानदाता जमे, मन में ऊंची ठान ।

    मन में ऊंची ठान, गिराकर पलक उठाऊं ।

    गिरे जमीन पर लोग, गिरा पर गाँठ लगाऊं ।

    मुश्किल जीना होय, कठिन हो जख्म छुपाना ।

    गम-सागर का नमक, छिड़क के खुब तड़पाना ।।

    ReplyDelete
    Replies
    1. वाह रविकर सर वाह आपके दोहों ने मेरी रचना को जो सम्मान दिया, कृतज हो गया हूँ आपका.

      Delete
  2. भरोसे के बदले, करे शक हमेशा,
    मुहब्बत का लहजा, सिखाना पड़ेगा,

    बेहतरीन नज्म अरुण भाई,
    आप इसी तरह लेखन का सफ़र तय करते रहें।
    मुझे आपकी ब्लॉग ज्वाइन करना अभी याद आया। इसलिए आज ही ज्वाइन किया।अपने एक नए प्रशंशक को कबूल करें।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आमिर भाई आपको रचना पसंद आई बहुत-2 शुक्रिया, भाईजान आपने ब्लॉग ज्वाइन किया आपका शुक्रिया.

      Delete
    2. bahut khoob anant ji , bahut sundar bhav hai aur sundar sher likhe hai aapne acchi najm , badhai , shubhkamnaye

      Delete
    3. बहुत-2 शुक्रिया शशि जी

      Delete
  3. नमक लेकर पीछे, जमाना पड़ा है ...
    वाह बहुत खूब

    ReplyDelete
  4. जखम छुपाना पडेगा वाह बहुत खूब रचना आखिर दिल है करना पडेगा

    युनिक तकनीकी ब्‍लाग

    ReplyDelete
    Replies
    1. बिलकुल विनोद भाई शुक्रिया

      Delete

  5. नमक लेकर पीछे, जमाना पड़ा है,
    जखम अपने दिल का, छुपाना पड़ेगा,
    लबों को यूं ही हंसाना पड़ेगा ,

    जख्मों को नमक से बचाना पड़ेगा .

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत-2 धन्यवाद वीरेंद्र सर

      Delete
  6. गजलो में तो आप उस्ताद है..
    बेहतरीन, बेहतरीन....
    :-)

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहे दिल से आभार रीना जी.

      Delete
  7. आपकी यह रचना बहुत अच्छी बनी है |
    आशा

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहे दिल से आभार आदरणीया आशा जी

      Delete
  8. bahut khoob arun ji... dil ke zakhmon ko bayan karti umda gazal!

    ReplyDelete
    Replies
    1. ह्रदय के अन्तःस्थल से आभार शालिनी जी

      Delete
  9. क्या कमाल की गज़ल हैं ... भई वाह ... बेहद उम्दा

    बधाई स्वीकारे।

    ReplyDelete
  10. नमक लेकर पीछे, जमाना पड़ा है....
    भई वाह बहुत खूब !!

    ReplyDelete
  11. कमाल की ग़ज़ल है...
    Simple and yet so beautiful :)

    ReplyDelete

आइये आपका स्वागत है, इतनी दूर आये हैं तो टिप्पणी करके जाइए, लिखने का हौंसला बना रहेगा. सादर