Monday, September 22, 2014

ग़ज़ल : प्रेम में हैं विभोर हम दोनों

प्रेम में हैं विभोर हम दोनों,
हो गए हैं किशोर हम दोनों.

चैन आराम लूट बैठे हैं,
बन गए दिल के चोर हम दोनों,

रूह से रूह का हुआ रिश्ता,
भावनाओं की डोर हम दोनों,

अग्रसर प्रेम के कठिन पथ पे,
एक मंजिल की ओर हम दोनों,

किन्तु अपना मिलन नहीं संभव,
हैं नदी के दो छोर हम दोनों..

4 comments:

  1. यही तो मुश्किल है - नदी के छोर हैं हम दोनों !

    ReplyDelete
  2. अग्रसर प्रेम के कठिन पथ पे,
    एक मंजिल की ओर हम दोनों,
    सफ़र आसन हो ही जाना है जब मंजिल एक ही है . खुबसूरत गज़ल

    ReplyDelete
  3. अग्रसर प्रेम के कठिन पथ पे,
    एक मंजिल की ओर हम दोनों,
    सफ़र आसन हो ही जाना है जब मंजिल एक ही है . खुबसूरत गज़ल

    ReplyDelete
  4. प्रेम और वेदना साथ साथ रहते हैं यहीं शायद प्रेम हैं
    http://savanxxx.blogspot.in

    ReplyDelete

आइये आपका स्वागत है, इतनी दूर आये हैं तो टिप्पणी करके जाइए, लिखने का हौंसला बना रहेगा. सादर